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ISSN 2292-9754

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06.29.2017


चिड़िया का बसेरा

मेरे घर के दरवाज़े पर, एक घोंसला न्यारा है,
उसमें चिड़िया रानी का चूज़ा भी प्यारा-प्यारा है।

चिड़ियारानी मुँह में कुछ लाती है उसे खिलाने को,
चहक रहे हैं छोटू राजा उछल रहे कुछ पाने को।

जब दाना मुँह में जाता वह झूम-झूम कर खाता है,
चीं-चीं-चीं-चीं के सुर में वह गीत मनोहर गाता है।

भरा हुआ है मेरा घर चिड़िया के एक बसेरे से,
मुन्नू चाह रहा है पकड़े चिड़िया आज सबेरे से।

बड़ी देर से लगा हुआ है पर वह हाथ न आती है,
जब-जब जाता पास चिरैया पंख खोल उड़ जाती है।


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