अन्तरजाल पर साहित्य प्रेमियों की विश्राम स्थली
ISSN 2292-9754

मुख पृष्ठ
02.23.2015


कटी पतंग के डोर नहीं हम

कटी पतंग के डोर नहीं हम
हंगामे के शोर नहीं हम

बिन मौसम जो नाच दिखाए
हैं उस वन के मोर नहीं हम

हम गीतों से जगा रहे हैं
पहरेदार हैं चोर नहीं हम

रहने को झुककर रहते हैं
पर इतने कमज़ोर नहीं हम

लिखते हैं अव्वाम की बातें
ग़ज़लों के चितचोर नहीं हम


अपनी प्रतिक्रिया लेखक को भेजें