अन्तरजाल पर साहित्य प्रेमियों की विश्राम स्थली
ISSN 2292-9754

मुख पृष्ठ
01.20.2018


तेरा एहसास तो है

तू नहीं,
तेरा एहसास तो है।
एक नूरानी चेहरा,
दिल के पास तो है।
तू न मिले फिर भी,
तेरे दीदार की आस तो है।
हम भी ख़ुश हैं ये सोचकर कि,
कोई कहीं हमारा भी,
ख़ास तो है।
तुझे पाने की चाह से ही,
जीवन में कुछ,
हास-परिहास तो है।
तेरी ही फ़िकर,
हर दिन,
हर पल,
इसका गवाह,
वो इतिहास तो है।
अरसों बीत जाते हैं,
ख़यालों में तेरे,
तेरे ही नाम की,
हर एक साँस तो है।
कृष्ण के प्रेम में,
गोपियाँ झूमें-गाए,
तुझे ही राधा मानता है कोई,
इसका तुझे भी,
आभास तो है।


अपनी प्रतिक्रिया लेखक को भेजें