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06.16.2007
 
आईये! पर्यावरण बचाएँ
अन्तरा करवड़े

उस दिन मिसेस खन्ना बड़ी मूड में थी। अजी मूड में नहीं, कहिये हवा में थी। उस दिन वे छप जो गई थी। और वो भी ऐसी वैसी नहीं, पूरे फोटो के साथ छपी थी। हरी हरी साड़ी में, पल्लू लहराते हुए छपीं थी उनकी फोटो, शहर के सिटी अखबार में। उनके साथ की सारी महिलाओं की साड़ियाँ फीकी पड़ गईं थी खन्ना मैडम के सामने। और इसी बीच किसी ने शगूफा छोड़ दिया, कि मिसेस खन्ना! आप तो बिल्कुल पर्यावरण मित्र की भाँति लग रही है। यदि प्रकृति माता भी अपनी प्रतिक्रिया देती तो कुछ यूँ ही लगती जैसी कि आप लग रही है इस चित्र में।

फिर क्या था! मिसेस खन्ना ने आनन फानन में अपनी ही जैसी कुछ महिलाओं को जमा किया और लगी अपना ज्ञान बघारने। हवा में तो वे थी ही उस दिन, लगे हाथ उन्होंने पानी, आकाश, अग्नि और भूमि की बातें भी कर डाली। अब ये बात और ही है कि वहाँ जमा महिलाओं ने समझा कि मिसेस खन्ना किसी आकाश और भूमि के अफेयर को लेकर चटपटी खबरें सुना रही है। हो सकता है कि अग्नि लड़के की माँ का नाम हो जो कि उनकी शादी के लिये तैयार न हो। अब ऐसे में बेचारे आकाश और भूमि को हमें ही बचाना होगा।

मिसेस खन्ना बोलती रही कि हमें पेड़ों को कटने से बचाना होगा जिससे पर्यावरण बच सके, हमें वृक्षारोपण करना होगा जिससे आनेवाली पीढ़ियाँ साफ हवा में साँस ले सके। लेकिन सुननेवाली रंगबिरंगी साड़ियों वाली महिलाएँ तो ये ही समझी कि हमें तो इस अफेयर में लड़के की नाक कटने से बचाना है जिससे बेचारी आनेवाली बहू को सास की तकलीफ न हो। इस मीटिंग में ये भी बताया गया कि पर्यावरण के मुद्दों को लेकर हर हफ्ते बातचीत होगी और किसी अच्छे वक्ता को बुलाया जाएगा। चूँकि ये काफी बड़ी समस्या है कि हमें हरियाली को बचाना है।

और वहाँ मौजूद सारी महिलाएँ समझ गई कि हमें अगले शनिवार को हरियाली तीज पर फिर मिलना है। हरी हरी साड़ियाँ पहननी है। अब हरी साड़ियों के साथ आर्टिफिशियल बीड्स के नेकलेस अच्छे लगेंगे या कुंदन स्टोन के मैचिंग्स! थोड़ा सा पर्ल इफेक्ट भी चल सकता है। फिर साड़ियाँ जरी पल्ले की हो तो भी चलेंगी। उसपर तो गोल्ड ज्वेलरी ही फबती है।

पर्यावरण की बातें चलते चलते रसोई, पकवान, ज्वेलरी, किटी और कपड़ों तक सिमट कर रह गई। मिसेस खन्ना ने अपनी नौकरानी रामी को बुलवाया और पनीर टिक्का, मुगलई पराँठे, पुडिंग और नवरतन कोरमा बुलवाने को कहा। अब वहाँ मौजूद सारी महिलाओं को पर्यावरण पर बातचीत में रस आने लगा। जल्दी ही ये तय हुआ कि अगले दिन ही इस मुद्दे पर आगे की तैयारी के लिये रात में पार्टी रख ली जाए। ठंड का मौसम है, लॉन में अलाव के साथ खूब सारी बातें होंगी।

फिर दो घन्टे तक दूसरे दिन के मीन्यू की चर्चा हुई। आगे का आधा घन्टा साड़ियों के रंग और ज्वेलरी के प्रकार निश्चित किये गए और पाँच मिनिट में ये तय कर लिया गया कि हमें पर्यावरण बचाना कैसे है।

अब मिसेस खन्ना की व्यस्तता तो पूछिये मत। पच्चीस महिलाएँ आनेवाली थी पर्यावरण बचाने। ये कोई ऐसी वैसी बात थी? अब ये अलग बात है कि किसी को पर्यावरण शब्द का अर्थ भी मालूम नहीं था तो किसी को ये भ्रांति थी कि मिसेस खन्ना अपना छपा हुआ फोटो सेलीब्रेट कर रही है। खन्ना मैडम ने जल्दी जल्दी रात का सारा ताम झाम समेटा और बचा हुआ खाना एक पोलीथीन की बैग में भरकर अपनी नौकरानी रामी को देती हुई बोली, “जा! इसे गाय को डाल आ।” रामी ने झट उत्तर दिया। “मालकिन! गाय को डालना है तो इसे कागज में दीजिये, बेचारी पोलीथीन खा जाएगी तो चार दिन में मर जाएगी।”

मिसेस खन्ना को काटो तो खून नहीं। पर्यावरण सुरक्षा की इतनी छोटी सी बात और वे नहीं जानती? उनकी नौकरानी रामी जैसी बुद्धि उनके पास क्यों नहीं है? लेकिन अगले ही क्षण उनकी कुटिल बुद्धि चल निकली। क्यों न इस बात को ही आज की पार्टी का मुख्य मुद्दा बना लिया जाए। जानवरों को पोलीथीन में खाना नहीं देना चाहिये। उन्हें तो कागज में खाना दिया जाना चाहिये। नहीं तो वे मर जाते है। और वे ये भी कहेंगी कि आनेवाले समय में इसके उपर एक डॉक्यूमेन्ट्री भी बनाने की सोच रही है।

खैर! मिसेस खन्ना पर्यावरण बचाने पर तुली रही। उन्होंने शाम की पार्टी के लिये अपने गार्डन के पच्चीस पौधै उखड़वा दिये जिससे पर्यावरण बचाने वाले क्लब की महिलाएँ अच्छे से अंताक्षरी खेल सके। फिर उन्होंने पिछवाड़े के आम के पेड़ को कटवा दिया जिससे पर्यावरण बचाने आ रही महिलाओं के लिये अलाव जलाने की लकड़ी मिल सके। फिर वे देर तक कचरा और पत्तियाँ जला जला कर वायु प्रदूषण फैलाती रही जिससे पर्यावरण बचाने आ रही उनकी सहेलियों को मच्छर न काटे।

और तो और उन्होंने सोचा कि पच्चीस महिलाएँ यदि उनके घर पार्टी में आ रही है तो उन्हें याद भी तो रहना चाहिये कि वे भी पर्यावरण बचाने के लिये मिसेस खन्ना के घर गई थी। फिर क्या था! उन्होंने आनन फानन में अपने माली को बुलवाया और ऑर्डर फरमाया कि जल्दी से पच्चीस पिंजरों में पच्चीस खुबसूरत काकातुआ तोते लाए जाएँ। आखिर पर्यावरण को बचाना है तो तोहफा भी तो ऐसा ही होना चाहिये।

सचमुच! मिसेस खन्ना की पर्यावरण बचाओ पार्टी बड़ी सफल रही। पर्यावरण को बचाने के चक्कर में पच्चीस पौधों की बलि दी गई। हवा को प्रदूषित किया गया। एक पेड़ काटा गया और पच्चीस परिंदों की ज़िंदगी दाँव पर लगा दी गई। काश कि ये सारा धन जो उस पार्टी के इंतजाम में लगा, उसे किसी शाला में बच्चों के लिये बाग विकसित करने हेतु दिया जाता या फिर चंद पौधे ही और लगा दिये जाते।

पार्टी में शामिल इन सभी महिलाओं का दूसरे दिन अखबार में अलाव पर हाथ सेंकते हुए, साड़ियाँ लहराते हुए, अपनी कीमती ज्वेलरी दमकाते और सौन्दर्य प्रसाधनों के दुरूपयोग से दमकता चेहरा लिये हुए छायाचित्र छपा। अब इस बार के फोटोग्राफ में मिसेस ओझा का चित्र सबसे अच्छा आया। उन्हें भी शगूफा मिल गया कि वे किसी शांति मिशन की कार्यकर्ता की माफिक लग रही है।


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