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ISSN 2292-9754

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12.26.2015


दिल के सोये हुए जज़्बात जगा देता हूँ

दिल के सोये हुए जज़्बात जगा देता हूँ
मैं इन्क़िलाब को लाने की सदा देता हूँ

तुमने समझा ही नहीं मेरी कला को अय दोस्त
मैं तो पत्थर को भी भगवान बना देता हूँ

जुल्म सहकर भी गवारा नहीं मुझको नफ़रत
मैं फ़क़ीरों की तरह सबको दुआ देता हूँ

लक्ष्य से हट नहीं सकता है इरादा मेरा
जो भी करना है उसे करके दिखा देता हूँ

मुझको अच्छी नहीं लगती है ख़ामोशी हरदम
इसलिए जब कभी कोहराम मचा देता हूँ

मैं हूँ ‘अनिरुद्ध’ मिरा काम है बस राहबरी
भूले भटकों को मैं मंज़िल का पता देता हू


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