अन्तरजाल पर साहित्य प्रेमियों की विश्राम स्थली
ISSN 2292-9754

मुख पृष्ठ
02.23.2015


आसाँ सा काम

आसाँ सा क्यों काम करते हो जी,
किसी की नज़र से क्यों गिरते हो जी!

वैसे भी नहीं कुछ भी दुनिया में हम,
जो हैं, उससे बताओ क्यों जलते हो जी!

प्यार करने से दुश्मन भी कर बैठें प्यार,
फिर, मुहब्बत से मेरी क्यों डरते हो जी!

मैं सवालों की दुनिया में भटका रहा,
जवाबों में नहीं मेरे क्यों मिलते हो जी!

इस ज़ुबाँ पर मैं ताला लगा न सका,
मेरे शिकवे नहीं तुम क्यों सुनते हो जी!


अपनी प्रतिक्रिया लेखक को भेजें