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12.06.2008
 

झलक
अली सरदार जाफ़री


सिर्फ़ लहरा के रह गया आँचल
रंग बन कर बिखर गया कोई

गर्दिश-ए-ख़ूं रगों में तेज़ हुई
दिल को छू कर गुज़र गया कोई
गर्दिश-ए-ख़ूं=रुधिर का बहाव; रग=नाड़ी

फूल से खिल गये तसव्वुर में
दामन-ए-शौक़ भर गया कोई
तसव्वुर=कल्पना,विचार; दामन-ए-शौक़=प्रेम की झोली


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