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05.28.2007
 

पते हैं ना रोते हैं ना हम फ़रियाद करते हैं
आतिशहैदर अली


 

तड़पते हैं ना रोते हैं ना हम फ़रियाद करते हैं
सनम की याद में हर-दम ख़ुदा को याद करते हैं

 

उन्हीं के इश्क़ में हम नाला-औ-फ़रियाद करते हैं
ईलाही देखिये किस दिन हमें वो याद करते हैं

 

नाला=ऊँचे स्वर में रोना

 

शबे फ़ुर्क़त में क्या सांप लहराते हैं सीने पर
तुम्हारी काकुल-ए-पीछां को जब हम याद करते हैं

 

शबे फ़ुर्क़त=विरह की रात; काकुल-ए-पीछां=घुंघराले बाल



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