अन्तरजाल पर आपकी मासिक पत्रिका

अन्तरजाल पर साहित्य-प्रेमियों की विश्राम-स्थली
वर्ष: 10, अंक 109,  जून प्रथम अंक, 2016
ISSN 2292-9754

लेखक या सम्पादक की लिखित अनुमति के बिना पूर्ण या आंशिक रचनाओं का पुर्नप्रकाशन वर्जित है। लेखक के विचारों के साथ सम्पादक का सहमत या असहमत होना आवश्यक नहीं।  सर्वाधिकार सुरक्षित। साहित्य कुंज में प्रकाशित रचनाओं में विचार लेखक के अपने हैं और साहित्य कुंज टीम का उनसे सहमत होना अनिवार्य नहीं है।
सम्पादक:- सुमन कुमार घई; साहित्यिक परामर्श:- डॉ. शैलजा सक्सेना; सहायता - विजय विक्रान्त; संरक्षक - महाकवि प्रो. हरिशंकर आदेश

कविता  |  कहानी  |  लघु-कथा  | सांस्कृतिक-कथा आपबीती  |  आलेख  |  हास्य-व्यंग्य  |   हास्य-व्यंग्य  |  हास्य/व्यंग्य कविताएँ
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सम्पादकीय:  हिन्दी साहित्य सार्वभौमिक? -

उत्कृष्ट साहित्य तो उत्कृष्ट है ही चाहे वह कहीं भी लिखा जाए। उदाहरण में प्रायः अंग्रेज़ी के साहित्य की देता हूँ – क्या अमेरिका, कैनेडा, ऑस्ट्रेलिया या न्यूज़ीलैंड के लेखक इंग्लैंड के समीक्षकों की हामी की प्रतीक्षा करते हैं? तो फिर हम ही क्यों? क्या हिन्दी साहित्य सार्वभौमिक नहीं है? पूरा पढ़िए

आपके पत्र - शुद्ध लेखन युक्तियाँ - विचारों का वृंदावन -
 इस स्तंभ में साहित्य कुंज व हिन्दी साहित्य के बारे में आपके पत्र प्रकाशित किए जायेंगे।
रचनाओं पर अपनी प्रतिक्रिया के लिए रचना के नीचे "अपनी प्रतिक्रिया लेखक को भेजें" बटन पर क्लिक करें और अपनी प्रतिक्रिया तुरंत सीधे लेखक/लेखिका को भेजें। धन्यवाद -
इस अंक के पत्र -
१.  विराम चिह्न
२. हिन्दी व्याकरण -
    कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय  
    भारतकोश
    हिन्दी साहित्य


डॉ. शैलजा सक्सेना द्वारा साहित्यिक प्रसारण का सराहनीय प्रयास:
विचारों का वृन्दावन वन!
इस अंक की कहानियाँ -
मजबूरी
अशोक परुथी "मतवाला"
डोली चढ़ना जानूँ हूँ
अर्चना सिंह "जया"
लव ऐट सिक्स्टी नाईन आईएनआर
रिशी कटियार
हास्य-व्यंग्य - (आलेख) हास्य-व्यंग्य - (कविता) सांस्कृतिक-कथा -
मामला वन वे वाला - प्रमोद यादव
कल-कल निनाद - डॉ. सुरेन्द्र वर्मा
तीसरे दर्जे का शुभचिंतक - :डॉ. अशोक गौतम
विलक्षण प्रतिभा के "लोकल" धनी - सुशील यादव
भ्रष्टाचार युगे-युगे - उषा बंसल
यमराज, चित्रगुप्त और हिन्दुस्तानी - अवधेश कुमार झा अक़लची बन्दर - डॉ. रश्मि शील
बाल साहित्य - लघु कथा - साक्षात्कार-
भैयाजी को अच्छी लगती, राम कटोरे - प्रभुदयाल श्रीवास्तव
आई हेट लव स्टोरी - अवधेश कुमार झा
बच्चों के मुख से -
ब्राईड ग्रूम बनाम ब्राईड ब्रूम - उषा बंसल
पेंशन, मजबूरी, औरत - कृष्णा वर्मा
होटल में डिनर - उषा बंसल
संकल्प - महर्षि त्रिपाठी
परिवर्तन, अपनापन - मनोज चौहान
वो परिवार, दादा-दादी, ससुराल - शबनम शर्मा
मेरी रचना प्रक्रिया - प्रभुदयाल श्रीवास्तव - ओमप्रकाश क्षत्रिय ‘प्रकाश’
आलेख शृंखला - साहित्य और सिनेमा -  शोध निबन्ध -  
इसी बहाने से-
मेपल तले, कविता पले - 6
 डॉ. शैलजा सक्सेना

इंग्लैंड के महान उपन्यासकार चार्ल्स डिकेंस की अमर कृति "ग्रेट एक्सपेक्टेशन्स"
प्रो. एम. वेंकटेश्वर
मुक्तिबोध और उनका मानवतावाद - प्रो. मृदुला शुक्ल
जनकवि केदारनाथ सिंह - डॉ. अशोक दत्त नौटियाल
समकालीन कवि सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की कविताओं में लोक जीवन - आशीष गुप्ता
आलेख - शोध निबन्ध -  अनूदित साहित्य
सूर के रामकाव्य में वात्सल्य वर्णन - डॉ. सुरंगमा यादव
प्रेम बहती हुई नदी है - शकुन्तला बहादुर
यथार्थ के धरातल की कविताएँ और उसकी विविधता : नारायण सुर्वे - हसन पठान
स्वामी विवेकानन्द का वेदान्त-विज्ञान - डॉ. पूर्णिमा केलकर
मुस्कान धर्म का प्रसार
(गुणवंत शाह रचित "कोकरवर्णो तडको" के सौजन्य से सधन्यवाद)
लेखक :पद्मश्री डॉ. गुणवंतभाई शाह
अनुवाद: डॉ. रजनीकान्त शाह
बिखरी विरासत
मूल लेखक : सुखमिंदर "रामपुरी"
अनुवाद : निर्मल सिद्धू
धरती बिछौना है
मूल लेखक : जोगिंदर "अणखिला"
अनुवाद : निर्मल सिद्धू
कविताएँ - शायरी -
प्रेम - डॉ. आराधना श्रीवास्तवा
लड़की - १, लड़की - २ - डॉ. ऋतु त्यागी
और अब - अशोक बाबू माहौर
वीर, गौरी, शाम ढले, बस आज की रात - अनमोल तिवारी "कान्हा"
नियंत्रण, कीड़े, नफ़रत - नरेश अग्रवाल
अवधूत सा पलाश - सन्तोष कुमार प्रसाद
वर्तमान परिवेश में साहित्यकारों की भूमिका - सुशील यादव
अमरकंठ से निकली रेवा - प्रद्युम्न आर चौरे
तेरी ज़रूरत - अविचल त्रिपाठी
बोर हो रहे हो तुम!, बच्चा पिटता है, तुम - डॉ. शैलजा सक्सेना
ख़ामोशी, कविता, दिन है या आप, ये भी तेरा, ध्यान एक अवसर है आजकल - सुरेन्द्र कुमार सिंह चांस
जिज्ञासा, तमगा, ताश का घर - अरविंद मिश्रा
साईकिल वाली लड़की - क़ैस जौनपुरी
न जाऊँगी बेटा मैं गाँव को छोड़ - मनजीत कौर
समय - लालजी सिंह यादव
होने का अहसास - निर्मल सिद्धू
अब यहाँ देखिये या वहाँ देखिये, मछली सी मेरी प्यास है, यूँ तो शहर से शहर सट गये - मनजीत कौर
खुला नया बाज़ार यहाँ, हर कोई अपना था, बुरे दिन हों तो - डॉ. उमेश चन्द्र शुक्ल
भरोसा न कीजे, ऐ सनम, फ़साद से - ठाकुर दास "सिद्ध"
बीती बातें याद न कर, आपको मैं मना नहीं सकता, नज़र को चीरता जाता है मंज़र - महावीर उत्तरांचली
पुस्तक समीक्षा / चर्चा-  पुस्तक समीक्षा / चर्चा-  पुस्तक समीक्षा / चर्चा- 

नवजागरण के परिप्रेक्ष्य में रवीन्द्रनाथ ठाकुर का कालजयी उपन्यास "गोरा"
प्रो. एम. वेंकटेश्वर

दोहरे चरित्र को बेनक़ाब करती कविताएँ -आखिर क्या हुआ?

शैलेन्द्र चौहान

"कही-अनकही" पुस्तक समीक्षा
आचार्य श्रीनाथ प्रसाद द्विवेदी, अध्यक्ष हिन्दी साहित्य परिषद, केनेडा
यात्रा संस्मरण - संकलन -
कनाडा डायरी के पन्ने

09_वह लाल गुलाबी मुखड़ेवाली
सुधा भार्गव

हिमाचल से नालदेहरा पुकारता
 डॉ. आरती स्मित
इस अंक में
महादेवी वर्मा
डॉ. हरिवंश राय बच्चन
आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी
त्रिलोचन शास्त्री
नागार्जुन
साहित्यिक समाचार -

कारागार में कविता एवं व्यंग्य पाठ
प्रस्तुति : लालित्य ललित

वातायन पोएट्री ऑन साउथ-बैंक पुरस्कार-समारोह 2016
 
ई - पुस्तकालय - (इस स्तम्भ के अन्तर्गत पुस्तकों का प्रकाशन धारावाहिक रूप में होगा)

भीगे पंख
लेखक : महेश द्विवेदी
मोहित और रज़िया /तीन/
 
शकुन्तला
पूर्व खण्ड - प्रथम सर्ग
उदय
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सूचना - साहित्य संगम -
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